मजा दुनियाभर में फैले कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच पिछले दिनों देश में विभिन्न इलाकों में खासतौर से उत्तर भारत में हुई बेमौसम बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि किसानों के लिए भारी आफत लेकर आई है। पूरे उत्तर भारत में गेहूं और सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं ओलवृष्टि से गेहूं, मटर, आलू और तिलहन की लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई हैं। मार्च के महीने में देश के कई हिस्सों में बदले मौसम के मिजाज का खमियाजा किसानों को उठाना पड़ा है। देश के कई हिस्सों में ओले गिरने की वजह से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों में किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड, पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी जिलों तक खेतों में गिरी फसलों को देखकर किसान बेहाल हैं। कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि देश में लाखों हेक्टेयर भूमि में खड़ी फसल बर्बाद हुई है। राज्यों से नुकसान के सर्वे के प्राथमिक आंकड़े भी आने लगे हैं जो बारिश के चलते भारी नुकसान की ओर इशारा कर रहे हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार राज्यों में सर्वाधिक असर गेहूं, चना, सरसों और आलू की फसल को पहुंचा है। फसल के साथ-साथ इस सीजन में उगने वाली सब्जियों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। जनवरी से लेकर मार्च तक कई बार देश के अलग-अलग हिस्सों में बेमौसम की बारिश और ओले का यह सिलसिला चल रहा है। फसलों की इस तबाही से किसान कर्ज के दलदल में भी फंसा हुआ है क्योंकि फसल नष्ट होने से उसकी बिक्री नहीं हो पायेगी। वह अपना कर्ज चुकाने में सक्षम भी नहीं होगा। कोरोना संकट और देश में लॉकडाउन ने किसानों को जितना चिंतित किया है, उतना किसान कभी नहीं हुए। महाराष्ट्र में मराठवाड़ा परेशान और विदर्भ में गेहूं, प्याज और आम को नुकसान पहुंचा है। गुजरात के सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में कैरी एवं जीरे की अधिकांश फसल खराब हो गई। इसके अलावा आलू, प्याज, सौंफ, धनिया और इसबगोल की फसलें भी बर्बाद हई। उत्तर प्रदेश के कई जिलों खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र में तो कई फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं. बंदेलखंड के किसानों के लिए दैवीय आपदा तकदीर बन गई है। कभी सूखा, कभी अतिवृष्टि तो कभी ओलावृष्टि ने फसलों को हमेशा तबाह किया है। इसने किसानों को भुखमरी के मुहाने पर खड़ा कर दिया। यमुना पट्टी से लेकर पाठा तक पड़े ओले से रबी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। चित्रकूट जिले में ओलावृष्टि और बारिश से काफी बड़े पैमाने में तबाही हुई है, सैकड़ों गांवों की फसल एक साथ खत्म हो गई। इतने बड़े पैमाने पर हुई फसल बर्बादी के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र के चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, बांदा और महोबा समेत कई जिलों के किसान पिछले दिनों सड़कों पर भी आये थे। किसान चौपट फसलों की भरपाई और कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं। बिगड़ते और अनियमित मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत में तैयार खड़ी फसल तबाह होने से किसान बर्बादी के कगार पर आ पहंचा तो कोरोना के साथ मौसम की दोतरफा मार पड़ रही है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में असमय बर्फबारी और बारिश भी लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई। निसंदेह, इन हालात से अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी पड़ेगी। कोरोना के साथ ही मौसम का ये बिगड़ा हुआ मिजाज खाद्यान्न महंगाई को बढ़ा सकता है। देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है लेकिन किसान और किसानी बेहद खस्ता हालात में हैं। किसान या तो कर्ज और तंगहाली में जी रहा है या फिर आत्महत्या कर रहा है। आज कोई भी खेती-किसानी नहीं करना चाहता, आप अपने आसपास सर्वे करके देख लीजिए आपको खुद पता चल जाएगा कि कितने लोग खेती कर रहे हैं या करना चाहते हैं। जो लोग किसानी कर भी रहे हैं उनमें अधिकांश बर्बादी के कगार पर हैं। ऐसे में भारतीय कृषि बड़े संकट की तरफ बढ़ रही है। कुल मिलाकर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि में देशभर के किसानों को जो भारी नुकसान हुआ है उसके लिए तत्काल केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर किसानों की मदद करनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर उनके लिए कुछ वैकल्पिक प्रबंध किये जाने की जरूरत है। किसान इस देश के विकास की सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी है और अगर किसान कमजोर और असहाय होगा तो इसका सीधा असर देश पर पड़ेगा। इसलिए इस विपदा के समय सरकार के साथ-साथ देश के आम नागरिकों को भी किसानों की यथासंभव मदद देने के लिए आगे आना होगा।