तो क्या लॉक डाउन के बीच ही प्रदेश की सभी फैक्ट्रियों को खोलने का हो गया था आदेश?

 कानपुर। कोरोना वायरस जैसी राष्ट्रव्यापी महामारी से पूरे देश को सरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा की गई थी। जिसके बाद से ही सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में काम ठप हो गया था। इन 21 दिनों में प्रधानमंत्री द्वारा देश के सभी नागरिकों से हाथ जोड़कर घर पर रहने की अपील की गई थी। प्रधानमंत्री की इस अपील का असर पूरे देश में स्पष्ट तौर पर दिखाई दिया और सभी ने इस लॉक डाउन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लोग घरों से निकलने से परहेज करते दिखेकोरोना वायरस के बाद देश भर में हए इस लॉक डाउन के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार रूप से सभी नागरिकों से सोशल डिस्टेंसिंग और हैंड वॉश जैसी मूलभूत विषयों पर लगभग-लगभग हर प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोर डालते दिखे। इसी बीच शहर में खुली एक अगरबत्ती फैक्ट्री जिसकी अनुमति को लेकर छिड़े घमासान के बाद सामने आया बीते दिनों शासन द्वारा जारी एक आदेशजिसके बाद से फैक्ट्री संचालक द्वारा इस आदेश की आड़ में अपने कर्मचारियों पर काम पर आने का दबाव बनाना शुरू कियागया। सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा फोन पर हुई बातचीत में जानकारी दी गई कि अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक आवश्यक और गैर-आवश्यक सभी वस्तुओं से संबंधित फैक्ट्रियों को खोले जाने का आदेश शासन द्वारा दिया जा चुका है जिसके बाद ही तिरंगा अगरबत्ती की तीनों फैक्ट्रियों का संचालन जिला अधिकारी के स्तर पर कुछ शर्तों के साथ अनुमति प्रदान किए जाने के बाद ही शुरू हुआ है। आपको बताते चलें कि इन फैक्ट्रियों में सोशल डिस्टेंसिंग जैसी जरूरी शर्त का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है जिससे फैक्ट्री में सैकड़ों की तादाद में मौजूद कर्मचारियों और मजदूरों का जीवन संकट में बना हुआ है। इसको लेकर यदि आप फैक्ट्री के अंदर का वीडियो देखेंगे तो अब खुद समझ जाएंगे कि किस प्रकार से फैक्ट्री के अंदर काम कर रही महिला कर्मचारी एक दूसरे से सट कर गोले के आकार में बैठकर काम करने को मजबूर है। इतना ही नहीं, यहां पर जिलाधिकारी द्वारा प्रदान की गई अनुमति की कई शर्तों का उल्लंघन लगातार रूप से जारी है। तिरंगा अगरबत्ती की फैक्टी का संचालन ऐसे वक्त में हो रहा है, जब अभी तक दुनिया कोरोना वायरस का इलाज नहीं ढूंढ पाई है। ऐसे में इस महामारी से बचने का एकमात्र उपाय सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और हैंड वॉश है, जिसकी फैक्ट्री संचालक द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद क्या सिटी मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी समेत कमिश्नर फैक्ट्री संचालक के विरुद्ध कार्यवाही करते हैं या फिर इसी प्रकार से सैकड़ों मजदूरों और कर्मचारियों की जिंदगी से खिलवाड़ यूं ही जारी रहेगा.....